✳️✳️ विद्यार्थी ✳️✳️
ओह्ह, आज रविवार है,
कपड़े मोड़ कर बिस्तर
की नीचे रख देता हूं,
खा-म-खा स्त्री के पैसे लग जाएंगे।
देखो ना जूते मुँह बा दिये हैं,
सिलवा लेता हूं इन्हें,
कुछेक महीने और गुज़र जाएंगे
फिलहाल फीस दे दें स्कूल की।
कितनी जल्दी टिफ़िन हो गई,
अच्छा आज सब्जी नही है,
कोई बात नही जल्दी-जल्दी,
अचार के साथ रोटी खा लेता हूं।
धुंधली शाम हो आई,जाता हूं,
ट्यूशन का समय हो आया,
पापा की बात हो गई है उनसे,
बिन पैसे, कुछेक महीने पढ़ा देंगे ।
जिस दिन बारिश बहुत तेज़ होती,
उस दिन भी जरूर जाता हूँ,
कहीं कुछ छूट ना जाये पढ़ाई,
और दोस्तों से मिलना।
#GKM

































