~~ अंतर्द्वन्द्व ~~
अंतर्द्वन्द्व से ओत-प्रोत ,
मन विकृत हो जूझ रहा।
हरेक तत्व घेरे चहुँओर से,
मन रक्त-द्रवित क्रन्दन करे।
कभी अश्रु निकलते नहीं,
मन निरंकुश हो खा रहा।
द्वन्द्व ने विभक्त कर,
परित्यक्त कर दिया।
अंतः मन दूर काया से,
चीत्कार करे स्तब्ध हो।
#GKM