🐙🐙🦇शहर🦇🐙🐙
डर लगता है, बहुत डर
ये शहर की जिंदगी,
फर्राटेदार गाड़ियां
अंधेरी रातों में बिन सोये
दौड़ती गाड़ियाँ।
डर लगता है, बहुत डर
निर्मम राजमार्ग,
मारती मिटाती इंसानियत,
रौंदती सुलाती हराती
दुसरों से आगे बढ़ती ।
डर लगता है, बहुत डर
अट्टालिकाओं में बस्ते
घर के अंदर घर,
फिर उसके भी अंदर घर,
लोग बस्ते माचिस के डिब्बों में।
डर लगता है, बहुत डर
लोगों के पुते हुए चेहरे,
चेहरे पे चढ़ा हुआ
एक और चेहरा ,
काटता नोचता बिन छुए।
डर लगता है, बहुत डर
घुटन बीमार हवा की,
बनावटी सब्जियों की
पापी पेट को शांत किये,
एकटक पैसों को देखते नयन
डर लगता है, बहुत डर ।।
#GKM