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Thursday, August 23, 2018

~~ याद ~~




~~ याद ~~

तो याद क्यों तेरी आती है बार बार ,
जबकि बार बार भूलने की करता हूँ कोशिश।


जबकि न रोने की करता हूँ कोशिश,
जबकि पलट कर न देखने की करता हूँ कोशिश,
जबकि यादों को पीछे छोड़ने की करता हूँ कोशिश,
जबकि रह रह कर, मेरे उंगली को तेरे उंगली से छू जाने का एहसास हो जाता है,



तो याद क्यों तेरी आती है बार बार ,
जबकि बार बार भूलने की करता हूँ कोशिश,



#gkm
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~~ yaad ~~


To yaad kyuuñ tirī aatī hai baar baar,
Jabki baar baar bhulne ki karta hu koshish.
Jabki na rone ki karta hu koshish,
Jabki palat kar na dekhne ki karta hu koshish
Jabki yadon ko pichhe chorne ki karta hu koshish,
Jabki rah rah kar mere ungli ko tere ungli se chhu jaane ka ahsas ho jaata hai,
To yaad kyuuñ tirī aatī hai baar baar,
Jabki baar baar bhulne ki karta hu koshish.

#gkm

Tuesday, March 27, 2018

✳️✳️ विद्यार्थी ✳️✳️

✳️✳️  विद्यार्थी  ✳️✳️

ओह्ह, आज रविवार है,
कपड़े मोड़ कर बिस्तर
की नीचे रख देता हूं,
खा-म-खा स्त्री के पैसे लग जाएंगे।

देखो ना जूते मुँह बा दिये हैं,
सिलवा लेता हूं इन्हें,
कुछेक महीने और गुज़र जाएंगे
फिलहाल फीस दे दें स्कूल की।

कितनी जल्दी टिफ़िन हो गई,
अच्छा आज सब्जी नही है,
कोई बात नही जल्दी-जल्दी,
अचार के साथ रोटी खा लेता हूं।

धुंधली शाम हो आई,जाता हूं,
ट्यूशन का समय हो आया,
पापा की बात हो गई है उनसे,
बिन पैसे, कुछेक महीने पढ़ा देंगे ।

जिस दिन बारिश बहुत तेज़ होती,
उस दिन भी जरूर जाता हूँ,
कहीं कुछ छूट ना जाये पढ़ाई,
और  दोस्तों से मिलना।

#GKM

Monday, March 26, 2018

🍁🍁 बिटियारानी 🍁🍁

🍁🍁  बिटियारानी  🍁🍁

तेरी एक मुस्कुराहट के खातिर ,
घोड़ा बन चौकी पर चलता रहा,
देखो आज भी तेरी खातिर ,
दौड़ आता हूं, फोन तुम्हारा है सोचकर।

तुम झट से समझ जाती हो मुझको,
जो कोई समझ नहीं पाता ,
बोलने पर भी तो देखो।
इस बंधन में सुकून है, जन्नत का।

नन्ही सी परी मेरे जीवन की,
और बस्ता तो देखो कोई ,
जैसे ईंट पत्थर भरे हुए जमाने के।
कब आज़ादी मिलेगी, इन बिके पढ़ाई से।

तुम्हें खाते देख है लगता मुझे,
मैंने खुद खाना खा लिया हो जैसे,
जूठा खा कर लगता तेरा
मानो लौट आया फिर बालपन मेरा

बिटिया तेरी हंसी ऐसी,
धूप मे  घनी छांव जैसी।
अलौकिक शक्ति का बिम्ब है,
जिसके घर तुझ जैसी बेटी है।

#GKM

Monday, March 19, 2018

~~ विषय : टीस ~~

विषय : टीस
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गर अहसास है, तो जिंदा हो तुम
गर मर्म है, तो जिंदा हो तुम
गर हया है, तो जिंदा हो तुम
गर कसक है, तो जिंदा हो तुम
गर जिद्द है, तो जिंदा हो तुम
गर आह है, तो जिंदा हो तुम
गर उत्सुकता है, तो जिंदा हो तुम
गर दर्द है, तो जिंदा हो तुम
गर कशिश है, तो जिंदा हो तुम
गर टीस है, तो जिंदा हो तुम
गर त्याग है, तो जिंदा हो तुम
गर संतोष है, तो जिंदा हो तुम
गर बेकरारी है, तो जिंदा हो तुम
गर इश्क है, तो जिंदा हो तुम
*वर्ना फक्त निर्मम दरख़्त हो *

हाइकु-बगीचा

विषय- उद्यान,बाग़,वाटिका,उपवन आदि समानार्थी
विधा : हाइकु   दिनांक:19.03.2018

गांव बगीचा
उग्रवादी बारूद
मासूम मरे

बीच शहर
फल-फूल बगीचा
प्रदूषण में

कारखाना के
सुस्त फूल बगीचा
मांगता मौत

आम बगीचा
सूखे पेड़ लकड़ी
लाश जलाए

चंदन बाग़
सांप लिपटे डाल
सूंघ खुसबू

#GKM

Saturday, March 17, 2018

🍁🍁 प्रश्नोत्तर 🍁🍁

🍁🍁 प्रश्नोत्तर 🍁🍁

कुछ प्रश्नों में ही जवाब होते है,
कुछेक उत्तर सवाल बन जाते है।
कुछेक सवालों को सुलझाते ही,
हमारी जिंदगी पूरी कट जाती है।

कुछेक उत्तर फिर प्रश्न बन जाती,
सुलझाने में और उलझ जाती है।
उसी उलझन में आराम मिलता है,
जिन्दगी बेलगाम बहती जाती है।

वक्त के साथ उत्तर जो हमने दिए थे,
वो वापस मेरे सामने प्रश्न बन खड़े हो गए।
तुम्हारे हरेक प्रश्न अब उत्तर से लगते है,
प्रतिउत्तर के ऐवज में तुम्हारी हुई हयात।

यही इंतज़ार की तुम अब प्रश्न करो,
मैं उत्तर दुँ, मैं प्रश्न करूँ, तुम जवाब दो।
जिंदगी थामे इस डोर को , मैं बंधा रहूं ,
डर इस बात का हमें, जिंदगी ना दे दे जवाब।

#GKM

Saturday, March 10, 2018

~~ अंतर्द्वन्द्व ~~

~~  अंतर्द्वन्द्व  ~~

अंतर्द्वन्द्व से ओत-प्रोत ,
मन विकृत हो जूझ रहा।

हरेक तत्व घेरे चहुँओर से,
मन रक्त-द्रवित क्रन्दन करे।

कभी अश्रु निकलते नहीं,
मन निरंकुश हो खा रहा।

द्वन्द्व ने विभक्त कर,
परित्यक्त कर दिया।

अंतः मन दूर काया से,
चीत्कार करे स्तब्ध हो।

#GKM

ख्यालात

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