🍁🍁 बिटियारानी 🍁🍁
तेरी एक मुस्कुराहट के खातिर ,
घोड़ा बन चौकी पर चलता रहा,
देखो आज भी तेरी खातिर ,
दौड़ आता हूं, फोन तुम्हारा है सोचकर।
तुम झट से समझ जाती हो मुझको,
जो कोई समझ नहीं पाता ,
बोलने पर भी तो देखो।
इस बंधन में सुकून है, जन्नत का।
नन्ही सी परी मेरे जीवन की,
और बस्ता तो देखो कोई ,
जैसे ईंट पत्थर भरे हुए जमाने के।
कब आज़ादी मिलेगी, इन बिके पढ़ाई से।
तुम्हें खाते देख है लगता मुझे,
मैंने खुद खाना खा लिया हो जैसे,
जूठा खा कर लगता तेरा
मानो लौट आया फिर बालपन मेरा
बिटिया तेरी हंसी ऐसी,
धूप मे घनी छांव जैसी।
अलौकिक शक्ति का बिम्ब है,
जिसके घर तुझ जैसी बेटी है।
#GKM
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