Saturday, March 10, 2018

~~ अंतर्द्वन्द्व ~~

~~  अंतर्द्वन्द्व  ~~

अंतर्द्वन्द्व से ओत-प्रोत ,
मन विकृत हो जूझ रहा।

हरेक तत्व घेरे चहुँओर से,
मन रक्त-द्रवित क्रन्दन करे।

कभी अश्रु निकलते नहीं,
मन निरंकुश हो खा रहा।

द्वन्द्व ने विभक्त कर,
परित्यक्त कर दिया।

अंतः मन दूर काया से,
चीत्कार करे स्तब्ध हो।

#GKM

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ख्यालात

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