✳️✳️ सीरिया ✳️✳️
वो जो निर्जन सा शहर दिख रहा,
लूट गया किसी के धर्म को बचाने में।
किसी ने प्यार से बसाया था अपना शहर,
शहर में अट्टालिकाएं,अट्टालिकाओं में घर।
घर के अंदर ममता अब कराहता ,
बच्चे-बूढ़े बेघर, अनाथालय तलाश रहे।
वो जो निर्जन सा आदमी है दिख रहा,
वो इंसानियत से खेलता है, हर वक़्त।
वहाँ रंगीन फूलों के गलियारों में ,
चमकता-चहकता था अहसास प्यार का।
अब उन गलियारों में गढ्ढे पड़े है,
बम-बारूदों के, सने हुए खून से।
वो इंसान थे , छोड़ गए घर उस शहर का,
साथ अपनों के, फिर नया शहर बसाने।
#GKM
#save_syria
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