विषय : साथी
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तुम हो कि सांस ले पाता हूं
वर्ना जिन्दगी तो मर चुकी थी।
तुम ही हो कि प्रेम सजग हुए
नही तो वीरान दयनीय दुनिया थी।
तुम्हारे मिठ्ठी वाणी ने गर्माहट दी
अन्यथा शरीर ठंडा पर चुका था
ये चहकते मुस्कान ने जोश दिये
वर्ना अवसाद बसर-ए-वक़्त चला था।
तुम दुख-सुख जो बांटते-सुनते हो
नही तो अकेला कष्ट सह बहा था
अब तुम्हारे लिए सजा-संवारा
वर्ना यूं ही शरीर ढोते जा रहा था ।
#GKM
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