Wednesday, March 7, 2018

🎆 विषय : गुफ़्तगू 🎆

विषय : गुफ़्तगू
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हम तो अल्फाज़ो को
समेटने मे लगे थे
आपसे गुफ़्तगू ने
ज़रीन ख्वाब दे दिए
ऐसा लगा कि
मैं मंत्रमुग्ध हो गया
की खोया हुआ
सांस नशीब हो गया।

अब निःशब्द मैं
जोड़ता हूं बिछडे
यादाश्त के पन्ने
कुछेक फटे
कुछेक बिखड़े
यत्न लगा के दिल से
ज़तन किया पूरा

परन्तु लगता बहुत दूर
निकल आये हम
तोड़ते वक़्त को
चीरते मूल्यों को
न जुड़ पाये यादाश्त
न मिल पाए लफ्ज।

वक़्त-ए-हयात के अंतिम सांस
मे आप ही रहोगे
पन्नों के स्याह मे भी क्योंकि
प्यार लफ्ज़ों मे कहाँ !!

#GKM

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ख्यालात

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