विषय : ऐतबार
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और उस खवाब मे
ज़ुस्तज़ु हो एहसासों की
तमन्ना हो मिलन की
तुम दीये जलाये रखना
दिल-ए-ऐतबार की ।
कभी तो दहलीज पार
नशीब होगी ज़ानिब
मरु मे जैसे तलब नीर की
तुम दीये जलाये रखना
दिल-ए-ऐतबार की।
कभी तो घण्टों
बीत गए बेबात
अब नज़र-ए-करम आस लगाए
तुम दीये जलाये रखना
दिल-ए-ऐतबार की।
#GKM
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